
डा. विष्णु राजगढ़िया
नागरिक अधिकारों को विस्तार देने वाला एक नया कानून आ रहा है- सेवा पाने की गारंटी का अधिकार - राइट टू गारंटी आॅफ पब्लिक सर्विसेस। पंजाब, मध्यप्रदेश, गोवा, बिहार में यह कानून बन चुका है। बिहार और पंजाब में यह 15 अगस्त से लागू होगा। झारखंड में भी ऐसे कानून का प्रारूप जारी करके नागरिकों से सुझाव मांगे गये हैं। यह आरटीआइ जैसा बड़ा बदलाव होगा। अब नागरिकों को सरकारी विभागों में चक्कर नहीं काटने होंगे। इससे शासन और प्रशासन को जवाबदेह बनाने की दिशा में नागरिकों के पास ज्यादा ताकत होगी। अब सूचना का अधिकार और सेवा पाने का अधिकार, दोनों एक-दूसरे के पूरक के बतौर काम करेंगे। इसलिए देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं, खासकर आरटीआइ कार्यकर्ताओं को सभी राज्यों के इस कानून या विधेयक का अध्ययन करके इस पर अभियान चलाना चाहिए। खासकर जहां अभी कानून बनने की प्रक्रिया चल रही है, वहां एक अच्छे कानून के लिए पूरी सोसाइटी को एकजुट करना चाहिए।
फिलहाल इस ब्लाॅग को एक ऐसा मंच बनाने में मदद करें। राइट टू सर्विस से संबंधित जो भी सामग्री आपके पास हो और जो अपको इस ब्लाॅग पर नहीं दिख रही हो, उसे ई-मेल द्वारा vranchi@gmail.com पर भेजने का कष्ट करें। साथ ही, अलग-अलग राज्यों में कहां अच्छे प्रावधान हैं और कहां कमजोर, इस पर अपने मूल्यांकन से अवगत करायें। अलग-अलग राज्यों ने अलग-अलग सेवाओं को इस एक्ट के दायरे में लिया है। कई राज्यों में सेवाओं का दायरा बेहद सीमित लगता है। कुछ राज्यों के विधेयक दूसरे किसी राज्य की हू-ब-हू नकल मालूम होते हैं। हम केंद्रीय स्तर पर ऐसा एक मजबूत कानून बनाने की दिशा में अभियान के लिए आगे बढ़ सकते हैं। कृप्या अपने सुझावों से मेरे ई-मेल vranchi@gmail.com अथवा मेरे मोबाइल 09431120500 पर अवगत कराने का कष्ट करें।